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आओ और अपने लण्ड से हमारी चूत की खुजली को शांत कर दो !

जब भगत सिहं को फ़ासीं होने वाली थी तो उससे कुछ दिन पहले वो लाहौर की जेल में बंद थे

Sandharbhamuga naa pookunu niku arpinchalanu kunna nu e roju ni ni baredu modda nu na janedu pookulo pettuko galiganu andi.nenu tana matalu vini avvakaiahnu.na challai noti nundi inta pachi matalu vini naa modda gali kottina cycle tube tayaraindi inka lavu ga balisi poindi.

tana shariram nunuchi manchi gandam suhasana vastundi padaharendla paduchu pilla vedi shariram nunchi vastunna panniru suhasanaki tana sharirapu vedi ki naa yevvana modda lechi

मैं किसी काम से मामा के यहाँ गया जो कि शहर में रहते हैं। जब मैंने घर पहुंचकर घण्टी बजाई तो दरवाजा मेरी मामी ने खोला।

और एक क्रन्तिकारी जिसने हँसते हँसते अपने प्राणों की आहुति दे दी और उनके कुछ बहुत याद किये जाने वाले गीत कविता , मेरा रंग दे बसंती चोला और खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है !

मुझे अपनी राय बताएँ इस कहानी पर ! मैं इंतजार करूँगा।

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जब मैंने मॉनीटर में ध्यान से देखा तो ऐसा लगा कि मेरे पीछे कोई खड़ा है और मैंने डर कर कम्प्यूटर बंद कर दिया। जैसे ही मैं पीछे मुड़ा तो मैंने देखा कि दीदी एकदम वहाँ से भाग कर बाथरूम में घुस गई। मैं शरमा कर बाहर आ गया। अब मुझे अजीब सा लग रहा था कि दीदी मेरे बारे में क्या सोचेंगी और मैं डर कर रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में जाकर लेट गया। पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं बाथरूम में पेशाब करने गया तो मैंने वहाँ पर दीदी की ब्रा और पैंटी देखी। मैं तो वहीं पर पागल हो गया और मैं और सब चीजों को सूंघने लगा। मुझे मज़ा आने लगा और मैं यह भूल गया कि मैंने बाथरूम के website दरवाज़े की कुण्डी नहीं लगाई है। मैं उन दोनों कपड़ों को सूंघता रहा।

मैंने कभी भी किसी लड़की की आज तक चूत नहीं देखी थी और मैं चूत देखने को बहुत लालयित था। मैं सोचता था कि कभी मुझे चूत के दर्शन करने को मिलेंगे क्या ! और मैं मुठ मार लिया करता था।

जब मैं निकली ससुर जी के कमरे से, वो भी जालीदार नाइटी और उसके नीचे कुछ न पहना था जिससे मेरे जवान मम्मे, कड़क हुए चुचूक साफ़ दिख रहे थे और ऊपर से सलवटें पड़ी हुई देख जेठ जी मुस्करा दिए। मुझे क्या मालूम था कि जेठ जी वहीँ मौजूद थे, मुझे देख उनकी आँखों में वासना चमकने लगी। मैं शरमा कर निकल गई।

मैं मुंबई में रहती हूँ, मेरे पापा रेलवे में अधिकारी हैं। हमारे परिवार में पापा-मम्मी और मैं ही हूँ। मेरी परवरिश अच्छी तरह से हुई है। अब सेक्स के बारे में मैं क्या बताऊँ। इस सेक्स के लिए मैं बहुत तड़फ़ी थी। जब मेरी उम्र बीस साल की थी तब मैंने पहली बार सेक्स किया था। तब मेरे पास चूत थी आज मेरे पास भोसड़ा है। अब मैं आपको अपनी पहली चुदाई कहने जा रही हूँ तो आप सब लोग अपना हथियार पकड़ कर रखना क्यूंकि यह कहानी पढ़कर आप सब लोगों के हथियार में से पानी निकल जायगा।

तो मामी ने कहा- यही तो मैं भी कहने वाली थी, जितने दिन चाहो उतने दिन रूको।

तो दीदी बोली- साले तू मेरी पैंटी क्यों सूंघ रहा था?

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